जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे, दिल लुभाते रहे
जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे , दिल लुभाते रहे ये बता दो , बता दो ये बता दो कहीं तुम , वही तो नहीं , वही तो नहीं जब भी झरनों से मैंने सुनी रागिनी मैं ये समझा तुम्हारी ही पायल बजी ओ जिसकी पायल पे ओ जिसकी पायल पे हम दिल लुटाते रहे , जां लुटाते रहे ये बता दो कहीं तुम... जिसके रोज़ रोज़ हम गीत गाते रहे , गुनगुनाते रहे ये बता दो कहीं तुम , वही तो नहीं वही तो नहीं ये महकते-बहकते हुए रास्ते खुल गए आप ही प्यार के वास्ते दे रही है पता मद-भरी वादियाँ जैसे पहले भी हम-तुम मिले हो यहाँ ओ कितने जन्मों से कितने जन्मों से जिसको बुलाते रहे , आज़माते रहे ये बता दो कहीं तुम...