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जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे, दिल लुभाते रहे

जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे , दिल लुभाते रहे ये बता दो , बता दो ये बता दो कहीं तुम , वही तो नहीं , वही तो नहीं जब भी झरनों से मैंने सुनी रागिनी मैं ये समझा तुम्हारी ही पायल बजी ओ जिसकी पायल पे ओ जिसकी पायल पे हम दिल लुटाते रहे , जां लुटाते रहे ये बता दो कहीं तुम... जिसके रोज़ रोज़ हम गीत गाते रहे , गुनगुनाते रहे ये बता दो कहीं तुम , वही तो नहीं वही तो नहीं ये महकते-बहकते हुए रास्ते खुल गए आप ही प्यार के वास्ते दे रही है पता मद-भरी वादियाँ जैसे पहले भी हम-तुम मिले हो यहाँ ओ कितने जन्मों से कितने जन्मों से जिसको बुलाते रहे , आज़माते रहे ये बता दो कहीं तुम...

है प्रीत जहाँ की रीत सदा मैं गीत वहाँ के गाता हूँ

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने,  भारत ने मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आयी,  तारों की भाषा भारत ने दुनिया को पहले सिखलायी देता ना दशमलव भारत तो,  यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था धरती और चाँद की दूरी का,  अंदाज़ लगाना मुश्किल था सभ्यता जहाँ पहले आयी,  पहले जनमी है जहाँ पे कला अपना भारत जो भारत है,  जिसके पीछे संसार चला संसार चला और आगे बढ़ा,  ज्यूँ आगे बढ़ा , बढ़ता ही गया भगवान करे ये और बढ़े,  बढ़ता ही रहे और फूले \- फले मदनपुरी: चुप क्यों हो गये ? और सुनाओ है प्रीत जहाँ की रीत सदा,  मैं गीत वहाँ के गाता हूँ भारत का रहने वाला हूँ,  भारत की बात सुनाता हूँ काले \- गोरे का भेद नहीं,  हर दिल से हमारा नाता है कुछ और न आता हो हमको,  हमें प्यार निभाना आता है जिसे मान चुकी सारी दुनिया,  मैं बात वोही दोहराता हूँ भारत का रहने वाला हूँ,  भारत की बात सुनाता हूँ जीते हो किसीने देश तो क्या,  हमने तो दिलों को जीता है जहाँ राम अभी तक है नर में,  नारी में अभी तक सीता है इतने पावन हैं ...

मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती

मेरे देश की धरती सोना उगले , उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती ... बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं सुनके रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे , मेरे देश ... जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अंगड़ाइयाँ लेती है क्यूँ ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जनम लिया , उसने ही पाया प्यार तेरा यहाँ अपना पराया कोई नहीं है सब पे है माँ उपकार तेरा , मेरे देश ... ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहाँ गांधी , सुभाष , टैगोर , तिलक , ऐसे हैं अमन के फूल यहाँ रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से , मेरे देश ...

मेरा प्यार वो है के, मर कर भी तुम को

मेरा प्यार वो है के , मर कर भी तुम को ( slow) जुदा अपनी बाहों से होने न देगा मेरा प्यार वो   है के , मर कर भी तुम को जुदा अपनी बाहों से होने न देगा मिली मुझको जन्नत तो जन्नत के बदले खुदा से मेरी जां तुम्हें मांग लेगा मेरा प्यार वो है ज़माना तो करवट बदलता रहेगा नए ज़िन्दगी के तराने बनेंगे मिटेगी न लेकिन मुहब्बत हमारी मिटाने के सौ सौ बहाने बनेंगे हक़ीकत हमेशा हक़ीकत रहेगी कभी भी न इसका फ़साना बनेगा मेरा प्यार वो है के ... तुम्हें छीन ले मेरी बाहों से कोई मेरा प्यार यूं बेसहारा नहीं है तुम्हारा बदन चांदनी आके छूले मेरे दिल को ये भी गवारा नहीं है खुदा भी अगर तुमसे आके मिलेगा तुम्हारी क़सम है मेरा दिल जलेगा मेरा प्यार वो है के ...

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी

अभी अलविदा मत कहो दोस्तों न जाने फिर कहाँ मुलाक़ात हो , क्योंकि बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी ये प्यार ये डूबी हुई रँगीन फ़िज़ाएं ये चहरे ये नज़ारे ये जवाँ रुत ये हवाएं हम जाएं कहीं इनकी महक साथ तो होगी बीते हुए लम्हों की ... फूलों की तरह दिल में बसाए हुए रखना यादों के चिराग़ों को जलाए हुए रखना लम्बा है सफ़र इस में कहीं रात तो होगी बीते हुए लम्हों की ... ये साथ गुज़ारे हुए लम्हात की दौलत जज़्बात की दौलत ये ख़यालात की दौलत कुछ पास न हो पास ये सौगात तो होगी बीते हुए लम्हों की ...

नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ

नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ धूप में जलता खेत हमारा , कर दे तू छाया छुपे हुए ओ चंचल पंछी , जा जा जा देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा बहता \- बहता क्यारियों में ठंडा \- ठंडा पानी चूम न ले कहीं पाँव तेरे , ओ खेतों की रानी चूम के मेरे पाँव मैले वो होगा मैला मैं हूँ खेतों की दासी तू खेतों का राजा हरी \- भरी इन खेतियों की राम करे रखवाली वो चाहे तो सौ \- सौ दाने देगी एक \- एक डाली मेहनत \- वालों की सुनता है वो ऊपर \- वाला खोल के रखियो अपनी झोली भर देगा दाता

न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो

न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो ग़मों का दौर भी आये तो मुस्कुरा के जियो न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो घटा में छुपके सितारे फ़ना नहीं होते अँधेरी रात में दिये जला के चलो न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो ये ज़िंदगी किसी मंज़िल पे रुक नहीं सकती हर इक मक़ाम पे क़दम बढ़ा के चलो न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो